“जेहि दिसि बैठे नारद फूली।, सो दिसि तेहि न विलोकी भूली।।
पुनि पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं।, देखि दसा हरिगन मुसकाहीं।।” में कौन सा रस है?
1
वात्सल्य रस
2
हास्य रस
3
रौद्र रस
4
वीर रस
5
वीभत्स रस