"अति मलीन वृषभानुकुमारी। अधोमुख रहित, उरध नहिं चितवत, ज्यों गथ हारे थकित जुआरी। छूटे चिहुर बदन कुम्हिलानो, ज्यों नलिनी हिमकर की मारी।।" प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा रस है ?
1
हास्य रस
2
करुण रस
3
सयोंग श्रृंगार रस
4
वियोग श्रृंगार रस
5
इनमें से कोई नहीं l