संयोग श्रृंगार रस किस पंक्ति में है -
1
सखी संग दै कुँवर तब चलि जनु राज-मराल।
देखत फिरइ महीप सब कर-सरोज जय-माल।।
देखत फिरइ महीप सब कर-सरोज जय-माल।।
2
बतरस लालच लाल की मुरली धरी लुकाय।
सौंह करै भौंहनु हंसे देन कहै नटि जाय।।
सौंह करै भौंहनु हंसे देन कहै नटि जाय।।
3
विकल्प 1 और 3
4
फिर पीटकर सिर और छाती अश्रु बरसाती हुई।
कुररी-सदृश सकरुण गिरा से दैन्य दरसाती हुई।।
कुररी-सदृश सकरुण गिरा से दैन्य दरसाती हुई।।
5
उपरोक्त में से कोई नहीं