Comprehension Passage

यों तो पश्चिम की युवा संस्‍कृतियों में पले हुए लोग प्राय: पूर्व की प्राचीन संस्‍कृतियों की चर्चा करते हुए 'संस्‍कृति के भार' की चर्चा किया करते हैं - बहुत लंबी सांस्‍कृतिक परंपरा का एक बोझ उस परंपरा में रहने वालों पर हो जाता है, जिससे वह समकालीन प्रत्येक प्रवृत्ति या घटना को सुदूर अतीत को कसौटी पर परखने लगते हैं, सामने न देख कर पीछे देखते हैं और एक प्रकार के नियतिवादी हो जाते हैं। भारत के बारे में और इसी प्रकार मिश्र आदि के बारे में पाश्‍चात्‍य अध्‍येताओं ने ऐसे विचार प्रकट किए हैं लेकिन अगर कुछ सहस्‍त्र वर्षों की सांस्‍कृतिक परंपरा का ही इतना बोझ हो सकता है, तो कल्‍पना कीजिए उस बोझ का, जो ब्रह्मा के एक युग की उद्भावना करने से पड़ता होगा। यद्यपि यह हम कह चुके कि ब्रह्मा का युग हमारी उद्भावना की पकड़ से बाहर की चीज़ है- वह काल्‍पनिक यथार्थता भी नहीं हो सकती।

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। 

‘प्रवृत्ति’ का अर्थ क्या है? 

1
तत्पर 
2
आदत 
3
निपुण 
4
प्रवेश 

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