Comprehension Passage

उन दिनों छुट्टियाँ थीं। आश्रम के अधिकांश लोग बाहर चले गए थे। एक दिन हमने सपरिवार उनके 'दर्शन' की ठानी। 'दर्शन' को मैं जो यहाँ विशेष रूप से दर्शनीय बनाकर लिख रहा हूँ, उसका कारण यह है कि गुरुदेव के पास जब कभी मैं जाता था तो प्रायः वे यह कह कर मुसकरा देते थे कि ‘दर्शनार्थी हैं क्या?” शुरू-शुरू में मै उनसे ऐसी बांग्ला में बात करता था, जो वस्तुतः हिंदी-मुहावरों का अनुवाद हुआ करती थी। किसी बाहर के अतिथि को जब मैं उनके पास ले जाता था तो कहा करता था, ‘एक भद्र लोक आपनार दर्शेर जन्य ऐसे छेन ।' यह बात हिंदी में जितनी प्रचलित है, उतनी बांग्ला में नहीं। इसलिए गुरुदेव ज़रा मुसकरा देते थे। बाद में मुझे मालूम हुआ कि मेरी यह भाषा बहुत अधिक पुस्तकीय है और गुरुदेव ने उस 'दर्शन' शब्द को पकड़ लिया था। इसलिए जब कभी मैं असमय में पहुँच जाता था तो वे हंसकर पूंछते थे 'दर्शनार्थी लेकर आए हो क्या?'

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्न का उत्तर बताइए ।

'एक भद्र लोक आपनार दर्शेर जन्य ऐसे छेन' पंक्ति किस भाषा में उल्लेखित है?

1
उर्दू
2
बांग्ला
3
अंग्रेज़ी
4
हिंदी

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