सिर पै बैठ्यो काग, आंख दोउ खात निकारत।
खींचत जिभहि स्यार, अतिहि आनंद उर धारत।।
उपरोक्त पंक्तियों में कौन सा रस है?
1
रौद्र
2
भयानक
3
श्रृंगार
4
बीभत्स
सिर पै बैठ्यो काग, आंख दोउ खात निकारत।
खींचत जिभहि स्यार, अतिहि आनंद उर धारत।।
उपरोक्त पंक्तियों में कौन सा रस है?