Comprehension Passage
कई सालों से बड़े-बड़े बिल्डर समंदर को पीछे धकेल कर उसकी जमीन को हथिया रहे थे। बेचारा समंदर लगातार सिमटता जा रहा था। पहले उसने अपनी फैली हुई टाँगें समेटीं, थोड़ा सिमटकर बैठ गया। फिर जगह कम पड़ी तो उकडूँ बैठ गया। फिर खड़ा हो गया... जब खड़े रहने की जगह कम पड़ी तो उसे गुस्सा आ गया। जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है। परंतु आता है तो रोकना मुश्किल हो जाता है, और यही हुआ, उसने एक रात अपनी लहरों पर दौड़ते हुए तीन जहाजों को उठाकर बच्चों की गेंद की तरह तीन दिशाओं में फेंक दिया। एक वर्ली के समंदर के किनारे पर आकर गिरा, दूसरा बांद्रा में कार्टर रोड के सामने औंधे मुँह और तीसरा गेट-वे-ऑफ इंडिया पर टूट-फूटकर सैलानियों का नजारा बना बावजूद कोशिश, वे फिर से चलने-फिरने के काबिल नहीं हो सके।
'जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है।' का भाव है-
1
महान व्यक्ति कभी भी क्रोध करने लगते हैं।
2
क्रोध करना महानता का प्रतीक है।
3
महान व्यक्ति बहुत अधिक क्रोध करते हैं।
4
महान व्यक्ति बहुत कम क्रोध करते हैं।