Comprehension Passage
शासन की पहुँच प्रवृत्ति और निवृत्ति की बाहरी व्यवस्था तक ही होती है। उनके मूल या मर्म तक उनकी गति नहीं होती । भीतरी या सच्ची प्रवृत्ति-निवृत्ति को जागृत रखने वाली शक्ति कविता है जो धर्म क्षेत्र में शक्ति भावना को जगाती रहती है। भक्ति धर्म की रसात्मक अनुभूति है अपने मंगल और लोग के मंगल का संगम उसी के भीतर दिखाई पड़ता है। इस संगम के लिए प्रकृति के क्षेत्र के बीच मनुष्य को अपने हृदय के प्रसार का अभ्यास करना चाहिए। जिस प्रकार ज्ञान नरसत्ता के प्रसार के लिए है उसी प्रकार हृदय भी। रागात्मिक्ता प्रवृत्ति के प्रसार के बिना विश्व के साथ जीवन का प्रकृत सामंजस्य गठित नहीं हो सकता। जब मनुष्य के सुख और आनंद का मेल शेष प्रकृति के सुख-सौंदर्य के साथ हो जाएगा, जब उसकी रक्षा का भाव, तृणगुल्म, वृक्ष-लता, पशु-पक्षी, कीट-पतंग सब की रक्षा के भाव के साथ समन्वित हो जाएगा। तब उसके अवतार का उद्देश्य पूर्ण हो जाएगा।
मनुष्य के अवतार का उद्देश्य कब पूर्ण होगा ?
1
मनुष्य समाज का शेष प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित होने से
2
मनुष्यों का आपसी सामंजस्य स्थापित होने पर
3
पशु-पक्षियों के साथ सामंजस्य स्थापित होने से
4
वृक्ष लता के साथ सामंजस्य स्थापित होने से