Comprehension Passage

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

विद्या + अर्थी से बना हुआ शब्द ‘विद्यार्थी’, जिसका अर्थ है - विद्या ग्रहण करने वाला| विद्यार्थी जीवन किसी भी व्यक्ति के जीवन का अहम और प्रथम पड़ाव होता है इस समय बच्चों का शारीरिक और बौद्धिक विकास होता है. इसलिए विद्यार्थी जीवन को मानव जीवन की रीढ़ की हड्डी कहें, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। विद्यार्थी काल में बालक में जो संस्कार पड़ जाते हैं, जीवन भर वही संस्कार अमिट रहते हैं। कहा जाता है कि विद्यार्थी एक कच्चे घड़े के समान होता है जिसको ठोक-पीटकर, सहलाकर किसी भी आकार में ढाला जा सकता है| इसीलिए इस काल को जीवन का आधारशिला कहा गया है। विद्यार्थी जीवन बाल्यकाल से ही प्रारंभ हो जाता है| यदि बाल्यकाल में नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जो विद्यार्थी इस समय मन लगाकर अध्ययन नहीं करता है तो लोग उसके बारे में ‘अक्ल पर पत्थर पड़ना’ जैसे शब्द का उपयोग करते हैं| कहा जाता है कि जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। ठीक इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है, वह आदर्श विद्यार्थी बनकर सभ्य नागरिक बन जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है, उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही तो सुंदर पाठशाला है। 

उपर्युक्त गद्यांश का मूल भाव क्या है? 

1
विद्यार्थी जीवन
2
अनुशासन
3
जीवन का महत्व  
4
सभ्यता का महत्व  

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