दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
दादा साहब फालके को भारत में सिनेमा कला का जनक कहा जाता है। फालके ने तय किया कि पहले एक छोटे बजट की फ़िल्म बनाई जाए। उन दिनों राजा हरिश्चंद्र विषय पर एक नाटक मुंबई में हिट जा रहा था इसलिए फालके ने भी राजा हरिश्चंद्र पर फ़िल्म बनाना तय किया। सन् 1912 में मानसून के बाद मुंबई के दादर इलाके में राजा हरिश्चंद्र के फिल्मांकन का काम आरंभ हुआ। दिनभर फ़िल्म की शूटिंग चलती और सभी काम करने वालों के लिए खाना बनता। रात को फ़िल्म को प्रोसेस करने और संपादन का काम किया जाता। रात-दिन लगकर पति-पत्नी ने छह माह में फ़िल्म तैयार की। फालके जानते थे कि अभी आधी लड़ाई ही जीती जा सकी है। 21 अप्रैल 1913 को मुंबई के ओलिंपिया सिनेमा में राजा हरिश्चंद्र का पहला शो गणमान्य नागरिकों और प्रेस के प्रतिनिधियों को दिखाया गया। भारतीय सिनेमा इस परिपाटी का आज तक पालन कर रहा है। तीन मई, 1913 को कोरोनेशन थियेटर में फ़िल्म का नियमित प्रदर्शन आरंभ हुआ। वहाँ यह लगातार 23 दिन तक चली, जो एक रिकॉर्ड था। उस जमाने में कोई भी फ़िल्म चार या छः दिन से ज्यादा नहीं चलती थी।