Comprehension Passage
गज़ल उर्दू की सर्वाधिक लोकप्रिय विधा है। उर्दू को यह विधा फारसी से प्राप्त हुई। प्रेमिका से बातचीत के रूप में व्याख्यायित होने के कारण गज़ल का प्रधान विषय प्रेम ही माना गया! इसमें इश्क और हुस्न को ही चित्रित करने की ऐसी परंपरा चली कि दीर्घकाल तक गज़ल केवल महबूब और महबूबा की बेफाई के हसीन ख्यालों, मधु-तिक्त दास्तानों और विचारों से ही समृद्ध होती रही। उर्दू शायरों ने गज़ल का संपूर्ण विषय, तत्संबंधी शब्दावली, अप्रस्तुत विधान आदि सभी चीज़ें फारसी साहित्य से ही ग्रहण कर ली। उर्दू के गज़लकार विदेशी साहित्यिक संपदा के बल पर हिंदुस्तान में अपनी धाक जमाने में इसलिए सफल हुए क्योंकि उनकी गज़लेंजिस भाव-संपदा पर आधारित थीं, वह हर देश-काल के मनुष्य की आधारभूत भावनाएँ हैं जिन पर उसकी ज़िंदगी का सुख-दु:ख निर्भर करता है। हर व्यक्ति में सौन्दर्य के प्रति स्वाभाविक ललक होती है और हर व्यक्ति में प्रेम करने या किसी का प्रेमास्पद होने की हसरत होती है। उर्दू गज़लों में प्रेम, जीवन की मिठास, कोमलता, समर्पणशीलता, तन्मयता आदि के साथ साथ विरह की तड़प, उदासी, निराशा, हताशा, प्रतीक्षा, प्रेमिका का अत्याचार, गिला-शिकवा आदि को इतने मार्मिक ढंग से और इतनी विविधता के साथ चित्रित किया गया है कि उनमें हर व्यक्ति को अपनी ज़िंदगी का सुख-दु:ख पर्याप्त यथार्थता के साथ मिल जाता है। मौलाना अल्ताफ हुसैन ‘हाली’ ने गज़ल के वस्तुक्षेत्र को विस्तृत करने के लिए लोगों का ध्यान इस सत्य की ओर आकृष्ट किया कि गज़ल जैसी सशक्त विधा में जीवन की तमाम वास्तविकताओं को मार्मिक ढंग से चित्रित किया जाना चाहिए।
गज़ल का प्रधान विषय प्रेम ही क्यों स्वीकार किया गया?
1
प्रेमिका से बातचीत के रूप में व्याख्यायित होने के कारण।
2
समाजवादी एवं प्रगतिवादी विचारों को प्रस्तुत करने के कारण।
3
फारसी साहित्य से प्रभावित होने तथा उससे अपना स्वरूप ग्रहण करने के कारण।
4
आध्यत्मिकता एवं रहस्यवाद के प्रस्फुटन के कारण।