Comprehension Passage

इस गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और चार विकल्पों में से प्रत्येक प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर चुनें।

हमारी हिंदी सजीव भाषा है। इसी कारण इसने अरबी, फारसी आदि के संपर्क में आकर इनके तो शब्द संग्रह किए ही है, अब अँगरेजी के भी शब्द ग्रहण करती जा रही है। इसे दोष नहीं, गुण ही समझना चाहिए, क्योंकि अपनी इस ग्रहणशक्ति से हिंदी अपनी वृद्धि कर रही है ह्रास नहीं । ज्यों-ज्यों इसका प्रचार बढ़ेगा, त्यों-त्यों इसमें नए शब्दो का आगमन होता जाएगा। क्या भाषा की विशुद्धता के किसी भी पक्षपाती में यह शक्ति है कि वह विभिन्न जातियों के पारंपरिक संबंध को न होने दे या भाषाओं की सम्मिश्रण-क्रिया में रुकावट पैदा कर दे ? यह कभी संभव नहीं। हमें तो केवल इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इस सम्मिश्रण के कारण हमारी भाषा अपने स्वरूप को तो नहीं नष्ट कर रही-कही अन्य भाषाओं के बेमेल शब्दों के मिश्रण से अपना रूप तो विकृत नहीं कर रही । अभिप्राय यह कि दूसरी भाषाओं के शब्द, मुहावरे आदि ग्रहण करने पर भी हिंदी, हिंदी ही बनी रही है या नहीं, बिगड़कर कही वह कुछ और तो नहीं होती जा रही है ?

अनुच्छेद के अनुसार हिंदी भाषा के किस गुण को दोष नहीं समझना चाहिए?

1
सिर्फ अपनी ही वृद्धि करना
2
किसी भी भाषा को ग्रहण नहीं करना
3
अपने शब्दों को बिगड़ने देना
4
विभिन्न भाषाओँ के शब्दों को ग्रहण करना

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