Comprehension Passage

निर्देश: नीचे दिए गये गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा प्रश्न के उत्तर गद्यांश में वर्णित तथ्यों के आधार पर दीजिए|

पहले इसके कि कई जातीयता के गुण प्रगट कर दिखलावें यह जानना अति आवश्यक है कि जातीयता क्या वस्तु है और क्यों जातीयता का भाव पैदा होता है| मनुष्यों में जातीयता का भाव दो कारणों से पैदा होता है एक प्राकृतिक दूसरा व्यावहारिक| प्राकृतिक कारण जातीयता का जुड़े देशों के बीच का शीत ऊष्ण उर्वर अनुर्वर इत्यादि का तारतम्य है और इस कारण उन-उन देशों के रहने वाले मनुष्यों में शारीरिक और मानसिक भावों का भेद हो गया वही एक-एक जाती बन गयी है| इसके अनुसार यूरोप के विद्वानों ने मनुष्य जाति के तीन भेद किये हैं| कोकेसीय मांगोलीय और इथियोपीय| ये तीनों जाति भेद केवल स्थान विशेष में निवास के कारण मनुष्य के शरीर की गढ़न और गौर या श्याम वरण के अनुसार किये हैं|पृथ्वी के जिन-जिन स्थानों में शीत की अत्यंत अधिकता है और भूमि उस स्थान की अनुर्वरा और नैसर्गिक दृश्य वैचित्र्य विहीन है ऐसे स्थान के निवासी प्रायः सब ठौर एक से शील स्वभाव के होते हैं| ये लोग बहुधा निष्किंचन और धन शून्य होते हैं| और इस कारण निष्ठुराचारी हिंसाविहारी प्रवंचनापटु शठ मूर्ख विश्वासघातक होते हैं| आखेट इत्यादि से अपना पेट येन के पाल लेते हैं| आखेट इत्यादि में अधिक परिश्रम करते-करते सबल और साहसिक अवश्य और प्राकृतिक दृश्य के अभाव के कारण उनकी बुद्धि स्फूर्ति विहीन होती है| इस जाति के लोग मध्य और दक्षिण अफ्रीका, मध्य एशिया, तिब्बत, तातार आदि अनेक देश के रहने वाले हैं| केंद्र के समीप जो देश हैं वहाँ बड़ी शीत से उन देशों के मनुष्य भी ऐसे ही निष्किंचन और साहसिक हैं|दूसरी श्रेणी के लोग वे हैं जो ऐसे स्थान में रहते हैं जो न अत्यंत शीत है न अत्यंत उष्ण हैं जहाँ की पृथ्वी कुछ उर्वरा और कहीं-कहीं नैसर्गिक शोभा संयुक्त है| योरोप खंड के रहने वाले अधिकांश इसी श्रेणी के हैं जिनका नवाभ्युत्थान और सौभाग्य इन दिनों हर एक बातों में तरक्की के ओर को पहुँचा हुआ है| भूमि यद्यपि यहाँ की बहुत पहाड़ी और अनुर्वरा है किन्तु योरोप वाले निज कलाकौशल और विज्ञान से पृथ्वी के सब खंडों से धन संपत्ति में बढ़े हुए हैं और मनुष्य जाति मात्र को शिक्षा देने का बाना बाँधे हुए हैं|तीसरी श्रेणी के वे हैं जो ऐसे स्थान में रहते हैं जहाँ गर्मी और सर्दी दोनों समान भाव से होती है| छः ऋतुओं का समय-समय प्रकाश होता है| वहाँ की धरती उर्वर प्राकृतिक दृश्य वैचित्र्य की अधिकाई से सुशोभित रहती है| ऐसा देश प्राचीन भारत प्राचीन ग्रीस और प्राचीन इटली तथा मिसिर देश हैं| इनमें ग्रीक्स और इटली अपनी अवनति देख ठीक समय में उससे छुटकारा पाने का यत्न कर शीघ्र अपनी उन्नति की दशा को पहुँच गए किंतु भारत के भाग्य में क्या बदा है सो कुछ नहीं कहा जाता| शताब्दी पर शताब्दी बीती जाती है किंतु इसके दुर्भाग्य की दशा में कुछ अदल-बदल नहीं होती दीखती| जैसी अचेत दशा में भारत पड़ा सो रहा है उससे बोध होता है मानो इसकी नाड़ी में जीवनी शक्ति है ही नहीं इसमें कुछ भी दम होता तो अवश्य उठने की चेष्टा करता|

 'साहसिक' शब्द का पयार्यवाची शब्द बताइए।

1
विहार
2
रजनीचर
3
निप
4
शाद

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation