Comprehension Passage
नीचे दिए गये गद्य को पढे और पुछे गये प्रश्नो के उत्तर दे:
मनुष्य सुख की खोज आदि काल से कर रहा है और इसी की प्राप्ति उसके जीवन का मुख्य उद्देश्य रहा है। दुःख से वह इतना घबराता है कि इस जीवन में ही नहीं, आने वाले जीवन में ऐसी व्यवस्था करना चाहता है कि वहाँ भी सुख का उपयोग कर सके। जन्नत और स्वर्ग, मोक्ष और नवनिर्माण सब उसी आकांक्षा की रचनाएँ हैं। सुख की प्राप्ति के लिए ही हमने जीवन को निस्सार और संसार को अनित्य कहकर अपने मन को शांत करने की चेष्टा की है। जब जीवन में कोई सार ही नहीं और संसार अनित्य है, तो फिर क्यों न इनसे मुँह मोड़कर बैठे ? लेकिन हम क्यों दु:खी होते हैं, वह कौन - सी मनोवृत्ति है जो हमें दुःख की ओर ले जाती है, उस पर हमने विचार नहीं किया है।
जीवन को मूल्यहीन मानकर हम क्या करना चाहते हैं?
1
जीवन को मूल्यहीन मानकर हम अपने मन को शांत करना चाहते हैं।
2
जीवन को मूल्यहीन मानकर हम सुख भोग करना चाहते हैं।
3
दुःख को जीवन मानकर सुख से हम मुँह मोड़ लेते हैं।
4
जीवन को मूल्यहीन मानकर हम सुख भोगना नहीं चाहते हैं।