निम्नलिखित अवतरण को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
गंगा पार झूँसी के खंडहर और उसके आस-पास के गाँवों के प्रति मेरा जैसा अकारण आकर्षण रहा है, उसे देखकर भी संभवतः लोग जन्म-जन्मांतर के संबंध पर व्यंग्य करने लगते हैं। है भी तो आश्चर्य की बात! जिस अवकाश के समय को लोग इष्ट-मित्रों से मिलने, उत्सवों में सम्मिलित होने तथा अन्य आमोद-प्रमोद के लिए सुरक्षित रखते हैं, उसी को मैं इस खंडहर और उसके क्षत-विक्षत चरणों पर पछाड़ें खाती हुई भागीरथी के तट पर काट ही नहीं, सुख से काट देती हूँ। ग्वालों के बालक जो गाय-भैंसों को बहकते देखकर लकुटी लेकर दौड़ पड़ते, गड़रियों के बच्चे जो अपने झुंड की एक भी बकरी या भेड़ को उस ओर बढ़ते देखकर कान पकड़कर खींच ले जाते और व्यर्थ ही दिन भर गिल्ली-डंडा खेलने वाले निठल्ले लड़के भी बीच-बीच में नजर बचाकर मेरा रुख देखना नहीं भूलते, कह नहीं सकती, कब और कैसे मुझे उन बालकों को कुछ सिखाने का ध्यान आया... मेरे विद्यार्थी पीपल के पेड़ की घनी छाया में मेरे चारों ओर एकत्र हो गए और वे जिज्ञासु कैसे थे सो क्या बताऊँ!