दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
आदिवासी चित्रकारों द्वारा सृजित समकालीन चित्र प्रदर्शनी में लगे सभी सौ चित्र अपने अनुष्ठान, अपनी परम्परा और अपनी समकालीनता को पुनर्सृजित करते है। इन सभी सौ चित्रों को देखने से यह साफ लगता है कि ये सभी कलाकार अपने ही रंग, रूप और आकार को हर बार कैनवस पर खोजते हैं। इन चित्रों और चित्रकारों में प्राप्त किए हुए को रचने की या बार-बार उसी को प्राप्त करने की चेष्टा नहीं वरन् हर बार नया प्राप्त करने की कोशिश है। यह प्रदर्शनी सहज है, विशिष्ट है और अत्यन्त जटिल भी। इस प्रदर्शनी के चित्रों में व्यक्त रंगों और रेखाओं की स्वतन्त्रता, प्रकृति और भाव के आदिम सामंजस्य का प्रतीक है। ये चित्र आत्मश्लाघा और अहंबोध से परे हैं यह मात्र रंगों और रेखाओं के प्रति अपने आग्रह और अनुराग को बतलाती हैं। इन चित्रों से साक्षात्कार करते समय हम सहज और सरल हो जाते हैं। सहजता और सरलता को प्राप्त करने के पीछे पीढ़ियों का ज्ञान और संघर्ष होता है, साथ ही होता है अभिव्यक्ति की मौलिक और आदिम इच्छा।