दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्न का विकल्प चुनिए।
कहा जाता है, स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है और स्वस्थ शरीर के लिए वातावरण का शुद्ध होना अत्यंत आवश्यक है। जनसंख्या की बेहिसाब वृद्धि और जनता की बढ़ती माँगों की आपूर्ति के लिए रोजगार और आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति के लिए बढ़ता औद्योगीकरण दोनों ने वातारण को सीमा से अधिक प्रभावित किया है। ऐसी अवस्था में वातारण का शुद्ध रहना स्वयं एक समस्या बन गया है। आज इसीलिए प्रदूषण चाहे वायु का हो, जल का हो अथवा ध्वनि का, एक नितान्त आधुनिक समस्या के रूप में सामने है क्योंकि जिस वातावरण में और जिस वायुमंडल में हम साँस लेते हैं, वह प्रदूषित होता जा रह है और यह स्थिति केवल भारत की नहीं बल्कि अधिकाँश देशों में प्रदूषण की समस्या विकट होती जा रही है। वैज्ञानिकों का तो यहाँ तक कथन है कि बेहिसाब हो रहे इस प्रदूषण के फणधारी साँप को यदि शीघ्र ही नहीं नियंत्रित किया गया तो आने वाले दशकों में यह पृथ्वी मनुष्य तो क्या किसी भी जीवधारी के रहने योग्य नहीं रह पाएगी, वनस्पतियाँ तक नहीं पनप पाएँगी, प्राणी के जीवन का तो प्रश्न ही नहीं उठता है।