दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्न का विकल्प चुनिए ।
प्रकृति और हमारा तादात्म्य संबंध है यह संबंध आज का नहीं, बल्कि जबसे सृष्टि की उत्पत्ति हुई है " तभी से यह संबंध शुरू हो गया था। प्रातः काल उठते ही जब हम पूर्व दिशा की ओर दृष्टिपात करते हैं तो उषा की लाली बरबस हमारा मन मोह लेती है। वर्षा ऋतु में उमड़ते-घुमड़ते मेघों की गड़गड़ाहट, कलकल बहती नदियों का मधुर स्वर, पहाड़ों से झर झर प्रवाहित होते निर्झर, बरसात के बाद आकाश में अपने सतरंगी रूप को छलकाता इन्द्रधनुष, पूर्णिमा की रात को पूरे चाँद की चांदनी का मनमोहक सौंदर्य, वनों-उपवनों में पक्षियों की मीठी गुंजार, मलयाचल से आने वाली ठण्डी और सुगंधित हवा, टिमटिम करते तारों से खंचित नीला अम्बर, ये सब हृदय को आह्लादित करने वाले मनोरम दृश्य स्वतः ही हमारे नयनों में समा जाते हैं तथा एक प्रकार के दिव्य आनन्द का हम अनुभव करने लगते हैं।