निम्नलिखित अनुच्छेद के आधार पर प्रश्न का उत्तर दीजिये-
यह ठीक है कि साहित्य का सृजन एक व्यक्ति करता है और उसके माध्यम से वह अपनी निजी अनुभूतियों और मान्यताओं की अभिव्यक्ति करता है। किन्तु वह व्यक्ति किसी-न-किसी समाज में रहता है, उस समाज की मर्यादाओं में पलता है और उसके गुणों-अवगुणों से प्रभावित होता रहता है। वह अपने समाज के प्रभावों से कभी अछूता नहीं रह सकता। जैसे वह समाज की उपज है वैसे ही उसकी कृति भी समाज सापेक्ष होती है। यही कारण है कि एक युग में लिखने वाले दो या तीन साहित्यकारों में समान विचारधारा मिलती है। रीतिकाल में जो उदासीनता और विलासिता छाई हुई थी, वह हिन्दी के सब कवियों में दृष्टिगोचर होती है। भारतेंदु युग के दौरान जो देश में नयी जागृति आ गयी, उसका प्रतिबिम्ब हिन्दी के तत्कालीन सभी कवियों की रचनाओं में पाया जाता है। इंग्लैण्ड के रेस्टोरेशन युग का भ्रष्टाचारपूर्ण जीवन उस युग के नाटकों में विकसित हुआ।'