मधुप गुनगुना कर कह जाता, कौन कहानी यह अपनी,
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ, देखो कितनी आज घनी।
इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास,
यह लो, करते ही रहते हैं, अपना व्यंग्य मलिन उपहास।
तब भी कहते हो-कह डालूँ, दुर्बलता अपनी बीती,
तुम सुनकर सुख पाओगे, यह गागर रीति।

कवि के जीवन की गागर कैसी है? 

1
रंगीन
2
खाली
3
भरी
4
सुनहरी

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