निम्नलिखित गद्यांश का ध्यानपूर्वक अध्ययन कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
सामान्यतः दुष्टों की वंदना में या तो भय रहता है या व्यंग्य, परंतु जहां हम हानि होने के पहले ही हानि के कारण की वंदना करने लगते हैं वहां हमारी वंदना के मूल में भय नहीं बल्कि उसकी स्थाई दशा की आशंका है। इस वंदना में दुष्टों को थपकी देकर सुलाने की चाल है जिसमें विघ्न बाधाओं से जान बच सके। आशंका से उत्पन्न या नम्रता गोस्वामी जी को आश्रय से आलंबन बना देती है। जब स्फुट अंशों के संचारी भावों तथा अनुभवों को छोड़कर वंदना के पीछे निहित भावना की दृष्टि से देखते हैं, तो यह आश्रय से संक्रमित आलंबन का उदाहरण बन जाता है। संतों, तों देवताओं तथा राम की वंदना पर्याप्त नहीं इसलिए दुष्टों की भी वंदना की जाती है। इससे दुष्टों के महत्व की भायिक सृष्टि होती है और वह उन्हें और भी उपहास्य बना देती है।