"माथे किरीट बड़े दृग चंचल,मंद हंसी मुखचंद जुन्हाई।"

उपरोक्त पंक्ति का अर्थ स्पष्ट करें?

1
श्रीकृष्ण के माथे पर चांदनी समान मुकुट चमक रहा है व मुख चंद्र समान है।
2
श्रीकृष्ण के नेत्र चंद्र समान विशाल हैं जिनसे चांदनी सी आभा निकलती है।
3
श्रीकृष्ण के माथे पर मुकुट है, विशाल नेत्र हैं और मुख चंद्र समान है जिससे चांदनी सी आभा निकल रही है।
4
श्रीकृष्ण की आभा चांदनी समान है।

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