Comprehension Passage

आकाश का साफ़ा बाँधकर

सूरज की चिलम खींचता

बैठा है पहाड़,

घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी,

पास ही दहक रही है

पलाश के जंगल की अँगीठी

अंधकार दूर पूर्व में

सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्ले-सा।

अचानक- बोला मोर।

जैसे किसी ने आवाज़ दी-

'सुनते हो'

चिलम औंधी

धुआँ उठा-

सूरज डूबा

अंधेरा छा गया।

उपर्युक्त पद्यांश को पढ़कर नीचे पूछे जाने वाले प्रश्न का उत्तर बताइए।

आकाश का वर्णन किस रूप में किया गया है?

1
किसान के साफे के रूप में
2
किसान के गमछे के रूप में
3
किसान की धोती के रूप में
4
इनमें से कोई नहीं

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