कबीर घास ना नींदिए, जो पाऊं तलि होई।

उडि पड़े जब आंखि में, खरी दुहेली होई।।

कबीर के इस दोहे के मूल भाव के समान भाव वाली कविता कौनसी है?

1
कन्यादान
2
ध्वनि
3
एक तिनका
4
आत्मकथ्य

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