"प्रभुता का शरण बिंब केवल मृगतृष्णा है।" से कवि का क्या आशय है। छाया मत छूना के आधार पर बताएं।
1
धन दौलत और बड़प्पन का एहसास केवल छलावा है। वह सिर्फ हमारे मन को दुख से भ्रमित करता है।
2
सिंह हिरण से बड़ा है यह सिर्फ उसका भ्रम है।
3
रेगिस्तान में रेत की चमक का बिंब मृगतृष्णा है।
4
धन दौलत और बड़प्पन कभी भी सुख से बड़ी नहीं होते। वह व्यक्ति को अंततः दुखी ही करती है।