"खा खाकर कुछ पाएगा नहीं,
न खाकर बनेगा अहंकारी।
सम खा तभी होगा समभावी,
खुलेगी सांकल बंद द्वार की।"
पंक्तियों के रचयिता हैं?

1
कबीर
2
रहीम 
3
बिहारी
4
ललद्यद

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