Comprehension Passage

निर्देशः दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

हरित क्रांति ने स्वतंत्रता के बाद ज़मींदारी उन्मूलन, भूमि सुधार जैसे कदमों के चलते भारत में समतामूलक समाज के निर्माण को गति प्रदान की। इससे छोटे व मध्यम स्तर के किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और इससे उनमें शिक्षा तथा राजनैतिक चेतना का विकास हुआ। हरित क्रांति के अंतर्गत आधुनिक तकनीकि और खादों का अधिकाधिक प्रयोग करके भूमि पर अधिक से अधिक फसलें उगाने का प्रयास किया गया। इसके लिए जब बड़ी मात्रा में रासायनिक खादों का प्रयोग किया गया तो भूमि की उर्वरक क्षमता कम हो गयी। सिंचाई के अधिक प्रयोग के कारण भूमि में नमक की मात्रा भी बढ़ गयी। हरित क्रांति देश के कतिपय हिस्सों जैसे-पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश आदि में ही केन्द्रित थी। अतः इन क्षेत्रों का तेजी से विकास हुआ लेकिन देश के अन्य क्षेत्र हरित क्रांति से वंचित रह गये। हमें हरित क्रांति की प्रेरणा तब मिली थी, जब साठ के दशक के मध्य में अच्छी फसल नहीं हुई थी और अकाल के हालात पैदा हो गए थे, लेकिन इसका असली उद्देश्य था, भारत में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना और अगर सटीक रूप में कहा जाए तो इसका मुख्य उद्देश्य भारत को खद्यान्न के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना था। हरित क्रांति में मुख्यतः गेहूँ के उत्पादन पर विशेष जोर दिया गया था। आज भारत खच्यान्न के उत्पादन के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर आत्मनिर्भर हो गया है व साथ ही गेहूँ और चावल के मामले में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और चावल का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है।

गेहूं का उत्पादक करने वाला विश्व का दूसरा देश कौन सा हैं?

1
रुस
2
चीन
3
भारत
4
जापान

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation