Comprehension Passage
भारत में इस नए काम को शुरू करनेवाले पहले व्यक्ति एक सावे दादा थे। दुर्भाग्यवश उनका असली नाम मैं भूल गया हूँ। मैं सन् 1941 में जब स्वर्गीय मास्टर विनायक की एक फिल्म 'संगम' लिखने के लिए कोल्हापुर गया था तब शालिनी स्टूडियोज में उनके दर्शन प्राप्त करने का सौभाग्य मुझे मिला था। मझोले कद के गोरे चिट्टे, दुबली-पतली कायावाले सावे दादा को देखकर कोई यह कल्पना भी नहीं कर सकता था कि ये अपने जमाने के बहुत बड़े कैमरामैन और भारतीय फिल्म व्यवसाय के आदि पुरुष रहे होंगे । मुझे तो अब याद नहीं कि सावे दादा कोल्हापुर ही के निवासी थे या बंबई, पुणे के पर बंबइया मार्का हिंदी वे मजे में बोल लेते थे। उन्होंने ल्युमीयेर ब्रदर्स के प्रोजेक्टर, फोटो डेवलप करने की मशीन या मशीनें खरीद कर भारत में इस धंधे का एक तरह से राष्ट्रीयकरण कर लिया था। जहाँ तक मेरी जानकारी है सावे दादा इंग्लैंड जाकर एक कैमरा भी लाए थे और शायद इंग्लैंड और फ्रांस के सिनेमेटोग्राफी कला विशेषज्ञों से भेंट करके उन्होंने भारत में इस उद्योग को स्थापित करने के लिए महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ भी प्राप्त की थीं। शालिनी सिनेटोन के एक कमरे में लकड़ी जड़ी कुर्सी पर टांग पर टांग चढ़ाए बैठे हुए चश्माधारी सावे दादा ने अपनी हल्की-फुल्की नकसुरी आवाज में मुझे उन प्रारंभिक अंग्रेज सिनेमेटोग्राफरों के नाम भी बातों के प्रसंग में ही बतलाए थे। सावे दादा ने छोटी-मोटी बहुत फिल्में बनाईं। भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ और कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रथम भारतीय छात्र सर आर० पी० परांजपे जो सन् 1936-37 के लगभग लखनऊ विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर भी हुए थे, उनके स्वागतोत्सव पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाई थी। इसी तरह लोकमान्य तिलक, गोखले आदि देश के मान्य नेताओं पर भी फिल्में बनाई थीं। मुझे यह भी याद पड़ता है कि भारतीय फिल्म उद्योग के जनक माने जाने वाले दादा साहब फालके द्वारा बनाई गई फीचर फिल्म 'हरिश्चंद्र' से पहले भी एक फीचर फिल्म बनी थी उसका नाम शायद 'भक्त पुंडलीक' था। दुर्भाग्यवश मैं उसके निर्माता का नाम भूल चुका हूँ (इनका नाम था दादा साहब तोरणे - संपादक)। हो सकता है वह फिल्म दादा साहब फालके ने ही बनाई हो। जो भी हो इतिहास ने दादा साहब फालके को ही भारतीय फिल्म उद्योग का जनक माना साबे दादा को नहीं । इसका कारण शायद यह भी हो सकता है कि दादा साहब फालके ने केवल एक ही नहीं वरन् कई फीचर फिल्म एक के बाद एक बनाई और इस प्रकार उन्होंने ही इस उद्योग की नींव जमाई।
दादा साहब फालके द्वारा बनाई गई पहली फीचर फिल्म कौन सी थी?
1
भक्त पुंडलीक
2
हरिश्चंद्र
3
लोकमान्य तिलक
4
गोखले