सांस्कृतिक दृष्टि से देखें तो सम्पूर्ण देश में एक अद्भुत समानता दिखाई पड़ती है। सारे देश में विभिन्न देवी-देवताओं के मन्दिर हैं। इन सबमें प्राय: एक-सी पूजा पद्धति चलती है। सभी धार्मिक लोगों में व्रत-त्योहारों को मनाने की एक-सी प्रवृत्ति है। वेद, रामायण और महाभारत आदि ग्रन्थों पर धार्मिक अनुष्ठान कर्म आया तो उसके भी अनुसरण पर सारे देश में विपुल साहित्य की रचना की गई। जब इस्लाम धर्म आया तो उसके भी अनुयायी सारे देश में फैल गए। इसी प्रकार ईसाई धर्मावलम्बी सम्पूर्ण देश में पाये जाते हैं। इससे सारा देश वस्तुत: एक ही सूत्र में बँधा हुआ है। भारतीय संस्कृति में ढले प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पहचान है। इस पहचान के कारण इस देश के लोग एक-दूसरे से अपना भिन्न अस्तित्व रखते हैं। विभिन्न प्रकार के रहन-सहन तथा पहनावे के होने पर भी सारा देश वस्तुत: एक ही है। यह सांस्कृतिक एकता ही वस्तुत: इस देश की वह शक्ति है जिससे इतना बड़ा देश एक सूत्र में बँधा हुआ है। विविधता में एकता की इस विशेषता पर सभी भारतीय गर्व करते हैं तथा इस पर संसार दंगे है।