Comprehension Passage

आकाश के तारों में शुक्र का कोई जोड़ नहीं। शुक्र चन्द्र का साथी माना गया है। उसकी आभा-प्रभा का वर्णन करने में संसार के कवि थके नहीं। फिर भी नक्षत्र मंडल में कलगी-रूप इस तेजस्वी तारे को दुनिया या तो ऐन शाम के समय, बड़े सवेरे घंटे-दो घंटे से अधिक देख नहीं पाते। इसी तरह भाई महादेव जी आधुनिक भारत की स्वतंत्रता के उषा काल में अपने वैसी ही आभा से हमारे आकाश को जगमगा कर, देश और दुनिया को मुग्ध करके शुक्र तारे की तरह ही अचानक अस्त हो गए। सेवा धर्म का पालन करने के लिए इस धरती पर जन्मे स्वर्गीय महादेव देसाई गाँधी जी के मंत्री थे। मित्रों के बीच विनोद अपने को गाँधी जी का ‘हम्माल' कहने में और कभी-कभी अपना परिचय उनके ‘पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर' के रूप में देने में वे गौरव का अनुभव किया करते थे। गांधीजी के लिए वे पुत्र से भी अधिक थे। जब सन् 1917 में वे गांधीजी के पास पहुंचे थे, तभी गांधीजी ने उनको तत्काल पहचान लिया और उनको अपने उत्तराधिकारी का पद सौंप दिया।

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्न का उत्तर बताइये:

प्रस्तुत गद्य में महादेव की उपमा किसके साथ की गई है?

1
शुक्र
2
चन्द्र
3
नक्षत्र
4
आकाश

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