Teaching EMRS JSA (Junior Secretariat Assistant) Mock Test Series 2023 हिन्दी साहित्य पाठ बोधन गद्यांश
Comprehension Passage
लक्ष्मण का मिट्टी की दीवार और पुआल के छप्पर से बना घर दलेइ बाँध से कुछ ही दूरी पर है । घर के चबूतरे पर बैठने से बाँध दिखता है, छप्पर पर बैठने से नदी का पानी दिखता है । इस गाँव के इतिहास के साथ नदी का इतिहास लिखा है । दलेइ बाँध की मिट्टी में कई लोगों का परिश्रम, पसीना और खून मिला है । नदी की बाढ़ का विकराल रूप देखने के बावजूद मनुष्य वहाँ से खिसका नहीं है, नदी के किनारे ही घर बनाया है उसने, इस तरह नगर और जनपद बनते गये और सभ्यता का विकास होता गया नदी के किनारे । मनुष्य के सुख-दुख का गीत गाती हुई नदी बह रही है, उसका पानी पीकर, उसी पानी से खेत सींच अनाज उत्पन्न करके वह जी रहा है । नदी की उपजाऊ मिट्टी ने जमीन को उर्वर बनाया है । जाल डालकर थोड़ी-बहुत मछली पकड़कर सुख-चैन से खाना खाते हैं लोग । बाढ़ आई है, बाँध के घेरे को तहस-नहस किया है; पर नदी को किसी ने शत्रु नहीं कहा, न ही कोई उसका किनारा छोड़कर भागा है । बल्कि उसी की ओर देखकर मन-ही-मन कहा है, शरारती नटखट बच्चे की तरह लोगों को परेशान कर रही है । खुद-ब-खुद मान जायेगी और अपने रास्ते चली जायेगी । हमारी नदी हमारा ही गीत गाती हुई मुहाने की ओर बह जायेगी । नाव को पतवार से खेते हुए माँझी भंज-संगीत गायेगा । लक्ष्मी के दिल में बेशुमार आशंकाएँ उठती हैं । बीच-बीच में उसका सीना तड़क उठता है । मन में अच्छे-बुरे ख्याल आते हैं । कहीं विपत्ति वाकई न आ जाए, ऐसा सोचकर सतर्क होते हुए उसने एक बोरे में थोड़ा-सा चिवड़ा, दो काँसे के बर्तन अंगोछा भरकर रख लिया । सन् पचपन वाली घटना उसे आज तक याद है । उस समय सास-ससुर और पति के साथ ऊँचे स्थान पर चढ़ गयी थी वह । तब भी एक बोरे में थोड़ा-सा चिवड़ा, कुछ कपड़े और दो-चार बर्तन रख लिये थे उन्होंने । मन रह-रहकर चौंक उठता था लक्ष्मण होता तो कुछ सहारा होता, साहस क्या बच्चों को लेकर वह इतने बड़े संकट का मुकाबला कर सकेगी ?
दलेइ बाँध की मिट्टी में क्या मिला है?
1
प्रेम
2
ध्यान
3
परिश्रम, पसीना और खून
4
संतोष