'छायावाद' नाम चल पड़ने का परिणाम यह हुआ कि बहुत से कवि रहस्यात्मकता, अभिव्यंजना के लाक्षणिक वैचित्र्य, वस्तुविन्यास की विश्रृंखलता, चित्रमयी भाषा और मधुमयी कल्पना को ही साध्य मानकर' चले। यह कथन किसका है?
1
मुकुटधर पाण्डेय
2
नन्द दुलारे वाजपेयी
3
रामचंद्र शुक्ल
4
नगेन्द्र