शशि-किरणों से उतर-उतरकर,
भू पर कामरूप नभ-चर,
चूम नवल कलियों का मृदु-मुख,
सिखा रहे थे मुसकाना।
प्रस्तुत पंक्तियों में दिन के किस भाग का वर्णन है?
1
संध्या का
2
रात का
3
प्रातः का
4
दोपहर का
शशि-किरणों से उतर-उतरकर,
भू पर कामरूप नभ-चर,
चूम नवल कलियों का मृदु-मुख,
सिखा रहे थे मुसकाना।
प्रस्तुत पंक्तियों में दिन के किस भाग का वर्णन है?