Comprehension Passage

इधर साहित्य के इतिहास-लेखन में काव्य-रूपों के अध्ययन का आग्रह बढ़ा है। कुछ लोगों के मतानुसार साहित्य का साहित्यिक इतिहास-लेखन साहित्य-रूपों की परिवर्तमानता के अध्ययन पर आधारित होता है। उनका कहना है कि साहित्य का इतिहास साहित्य-रूपों का इतिहास है। अनेक अर्थों में यह सही है। पर विधाओं का चयन और परिवर्तन एक विशिष्ट ऐतिहासिक संदर्भ में होता है। एक कालावधि के बाद साहित्य-रूप बदल जाते हैं। आखिर इस बदलाव के कुछ ऐतिहासिक कारण होंगे। इन कारणों की खोज के अभाव में साहित्य का समाज-संपृक्त इतिहास नहीं होगा।

परिच्छेद को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर लिखिए:

किन कारणों की खोज के अभाव में साहित्य का समाज-संपृक्त इतिहास नहीं हो सकता?

1
इतिहास लेखन
2
अध्ययन के आग्रह
3
काव्य-रूपों के अध्ययन
4
साहित्य-रूपों के बदलावों के कारणों

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