Comprehension Passage

निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

दुर्योधन वह भी दे न सका, आशिष समाज की ले न सका,

उलटे, हरि को बाँधने चला, जो था असाध्य, साधने चला।

जब नाश मनुज पर छाता है

पहले विवेक मर जाता है

हरि ने भीषण हुँकार किया, अपना स्वरूप विस्तार किया,

डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवान कुपित होकर बोले ।

“जंजीर बढ़ाकर साध मुझे,

हाँ-हाँ दुर्योधन ! बाँध मुझे

यह देख गगन मुझमें लय है, यह देख पवन मुझमें लय है,

मुझमें विलीन झंकार सकल, मुझमें लय है संसार सकल ।

सब जन्म मुझी से पाते हैं -

फिर लौट मुझी में आते हैं। "

उपर्युक्त पद्यांश की भाषा है :

1
संस्कृतनिष्ठ हिन्दी।
2
तद्भवनिष्ठ हिन्दी।
3
आम बोलचाल की हिन्दी।
4
देशज शब्दप्रधान हिन्दी।
5
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