निम्नलिखित गदयांश को ध्यानपूर्वक पढ़े और प्रश्न के उत्तर दीजिये:
हाल के वर्षों में आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक भयंकर चुनौती के रूप में उभरा है। वह विश्व क्षितिज पर प्रलयंकारी बादलों की भाँति छाया हुआ है और प्रतिपल मानव के लिए संकट का कारण बना हुआ है। न जाने कहाँ और किसके ऊपर उसका वज्रपात हो जाए और विनाशलीला प्रकट हो जाए। इसके कारण मानव हर क्षण संत्रस्त है। वह केवल मूकदर्शक बना हुआ है। आतंकवाद और मानव मूल्यों की बात की जाए तो दोनों ही संपूर्ण रूप से परस्पर विपरीत हैं। आतंकवाद वास्तव में अतिवाद का दुष्परिणाम है। आज के भौतिकवादी युग में आतंकवाद की काली छाया बहुत तेजी से बढ़ रही है। इसके कारण मनुष्य में असंतोष की भावना उत्पन्न हो रही है। इस असंतोष की अभिव्यक्ति के अनेक माध्यम हैं। यह असंतोष, क्रुद्ध युवा पीढ़ी में बुरी तरह फैल रहा है। राजनीतिक स्वार्थपरता की पूर्ति के लिए आतंकवाद आज एक अमोघ अस्त्र बन गया है। हत्या, लूट, बलात्कार, अपहरण आदि इसके सामान्य रूप हैं। अपनी बात मनवाने के लिए आतंक उत्पन्न करने की पद्धति एक सामान्य प्रक्रिया बन गई है। जब कोई शक्तिशाली राष्ट्र निर्बल राष्ट्र के प्रति उपेक्षा का व्यवहार करता है तो प्रायः इसका प्रतिकार आतंकवाद के रूप में सामने आता है। उपेक्षित वर्ग अपनी अस्मिता प्रमाणित करने के लिए आतंकवाद का मार्ग अपनाता है।