राम को रुप निहारति जानकी कंकन के नग की परीछांहि I
याते सवे सुधि भूलि गई कर टेक रही पल हारत ना II पंक्ति में कौन-सा रस है?
1
शृंगार
2
हास्य
3
शांत
4
करुण
राम को रुप निहारति जानकी कंकन के नग की परीछांहि I
याते सवे सुधि भूलि गई कर टेक रही पल हारत ना II पंक्ति में कौन-सा रस है?