दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्न का विकल्प चुनिए।
19 वीं सदी में असम में चाय की खेती शुरू हुई। 1823 में रॉबर्ट ब्रुश ने ब्रह्मपुत्र घाटी में चाय की उपस्थिति को जाना - पहचाना था। बाद में उनके भाई चार्ल्स ने कुछ पौधों को कोलकाता के बॉटिनिकल गार्डन के अधीक्षक के पास भेजा था। वहाँ इनकी जाँच से पता लगा कि ये चीन में पाए जाने वाले चाय के पौधों के समूह से हैं। अलबत्ता प्रजाति भिन्न है। पड़ताल के बाद इन पौधों को लेकर आगे कोई प्रयास नहीं हुआ। बात ठंडी पड़ गई।
1832 में कैप्टन जेंकीन ने अपनी रिपोर्ट में असम में चाय के पौधों की मौजूदगी दर्ज की। तब 1835 में लखीमपुर में पहला चाय बागान विकसित किया गया। यहीं से असम में चाय की खेती शुरू हुई। 1840 में 'असम टी' कंपनी की स्थापना हुई। फिर धीरे-धीरे कामरूप, दारंग, ऊपरी असम और कछार में खेती शुरू हुई। चाय बागानों की स्थापना के साथ ही उनमें काम करने वाले 'लेबर' या 'कुली' की ज़रूरत महसूस हुई। स्थानीय लोगों ने इस काम में कोई रूचि नहीं दिखाई। तब अन्य हिस्सों से मजदूर लाने का प्रयास शुरू हुआ। चाय बागानों का विकास तभी संभव हुआ जब इनके लिए पश्चिम बंगाल, छोटा नागपुर (झारखंड), मध्यप्रदेश और उड़ीसा से मज़दूर आयात करके आसाम में बसाए गए।