“दृग उरझत, टूटत कुटुम, जुरत चतुर चित प्रीति। परति गाँठ दुरजन हिये, दई नई यह रीति।।"
पंक्तियों में अलंकार है -
1
विरोधाभास
2
भ्रांतिमान
3
विभावना
4
असंगति
“दृग उरझत, टूटत कुटुम, जुरत चतुर चित प्रीति। परति गाँठ दुरजन हिये, दई नई यह रीति।।"
पंक्तियों में अलंकार है -