"लिखन बैठी जाकी सबी गति गहि गरब गरूर I
भए न केते जगत के चतुर चितेरे कूर II"
इस दोहे में 'सबी' शब्द का अर्थ है :
1
चित्र (नायिका के समान)
2
काल्पनिक चित्र
3
आदर्श चित्र
4
मनोनुकूल चित्र
"लिखन बैठी जाकी सबी गति गहि गरब गरूर I
भए न केते जगत के चतुर चितेरे कूर II"
इस दोहे में 'सबी' शब्द का अर्थ है :