Teaching Haryana (HPSC) Assistant Professor Mock Test 2025 हिन्दी साहित्य साहित्य चिंतन काव्यशास्त्र
‘कनक कनक तैं सौ गुनी, मादकता अधिकाइ ।
उहिं खाएँ बौराई जग, इहिं पाएँ बौराई ।।
उक्त दोहे का अभिप्रेत अर्थ है -1
धुतरे में बहुत नशा होता है ।
2
धुतरा खाने से आदमी बावला हो जाता है ।
3
सोना छूने से आदमी बावला हो जाता है ।
4
धन-दौलत पाने मात्र से आदमी बावला हो जाता है ।
5
अनुत्तरित प्रश्न