"रुपए हों तो न हुक्का- पानी का काम है, न जात-बिरादरी का। दुनिया पैसे की है, हुक्का-पनि कोई नहीं पूछता।"- गोदान उपन्यास में यह कथन किस पात्र का है?

1
होरी 
2
गोबर 
3
गोविंदी 
4
झुनिया 
5
अनुत्तरित प्रश्न

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