"स्थायी भाव जब विभाव, अनुभाव एवं संचारी भावों के योग से आस्वादन करने योग्य हो जाता है, तब सहृदय प्रेक्षक के हृदय में रस रूप में उसका आस्वादन होता है।" रस की यह परिभाषा किस विद्वान ने दी है?
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आचार्य विश्वनाथ
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आचार्य रामचंद्र शुक्ल
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आचार्य धनंजय
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आचार्य श्याम सुंदर दास
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अनुत्तरित प्रश्न