Comprehension Passage

निर्देश: विचलित होने का नहीं देखता मैं कारण  

हे पुरुष - सिंह , तुम भी यह शक्ति करो धारण ,

आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तर ,

तुम वरो विजय संयत प्राणों से प्राणों पर ,

रावण अशुद्ध होकर भी यदि कर सका त्रस्त 

तो निश्चय तुम हो सिद्ध करोगे उसे ध्वस्त ,

शक्ति की करो मौलिक कल्पना , करो पूजन ,

छोड़ दो समर जब तक न सिद्धि हो , रघुनन्दन ! 

कवि की जीवन दृष्टि क्या है ? 

1
छायावादी 
2
प्रयोगवादी 
3
प्रगतिवादी 
4
सामंतवादी 
5
अनुत्तरित प्रश्न

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