निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिये -
वर्तमान सरकार राज्य और राष्ट्र के मूलभूत विभेद को जान-बूझकर ओझल कर देना चाहती है ताकि राजद्रोह और राष्ट्रद्रोह की खाईं को पाटकर राज्य के प्रति असहमतियाँ रखने वाले तमाम स्वरों को राष्ट्रद्रोह (राजद्रोह) के मूसल से कुचला जा सके। लेकिन अंबेडकर राष्ट्र को राज्य का पर्याय नहीं मानते और उनका साफ कहना है कि 'एक भी ऐसा आधुनिक राज्य नहीं है जिसने कभी न कभी किसी राष्ट्रीय समुदाय को अपनी सत्ता के अधीन रहने को बाध्य न किया हो।' मतलब साफ है कि एक तो यह सदैव जरूरी नहीं कि एक राज्य एक राष्ट्र भी हो और द्वितीय, राज्य प्रायः राष्ट्रीयताओं के दमन की हेतु संरचना साबित हुई है। जो सरकार आज विरोधी समुदायों और दलों का दमन करते हुए स्वयं को राष्ट्र का पर्याय साबित करने में लगी हुई है, उसकी मुख्य राजनीतिक दल तो पिछले आम चुनाव में देश के तीस फीसदी मतदाताओं का विश्वास भी अर्जित नहीं कर पाई थी। और जहाँ तक हमारी राष्ट्रीयता का संबंध है तो वह वास्तव में अलग-अलग जातीयताओं का समन्वय ही है जो एक अखिल भारतीय राष्ट्रीयता के निर्माण के दौर से गुजर रही है। हाँ, ये अलग बात है कि कुछ अतिवादी तत्वों को छोड़ दें तो ये जातीयताएँ मुस्लिम लीग की जैसे पृथकतावादी राष्ट्रवादी चरित्र नहीं रखती हैं क्योंकि भारत के विभाजन और पाकिस्तान के जन्म से सबक लेते हुए हमारे संविधान निर्माताओं ने अंबेडकर के नेतृत्व में हिंदुस्तान को एक पंथनिरपेक्ष राज्य घोषित किया था। स्पष्ट है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और उसकी राजनीतिक इकाई भाजपा वर्तमान मोदी सरकार की छत्रछाया में जिस प्रकार हिंदू राष्ट्रवाद लाने के लिए हाथ-पैर मार रही है, वह सब राज्य को विघटन की दिशा में ले जाने वाला है। अगर हिंदुत्ववादी शक्तियों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो इतिहास एक बार फिर सैंतालीस की त्रासदी के साथ स्वयं को दोहरा सकता है।