निम्न गद्यांश का अध्ययन कीजिए तथा दिए गए प्रश्नों के उत्तर का सही विकल्प चुनिए-
आज विकसित और विकासशील देश पर्यावरण प्रदूषण की जिस विभीषिका से गुजर रहे हैं, वह किसी से छिपी नहीं है। ओजोन परत में जो क्षति हुई हैं, उसके दीर्घकालिक खतरे विश्व समुदाय को बैचेन किये हुये हैं। परमाणु बम के प्रयोग और निर्माण से जुड़े विकिरण, मोबाइल टावरों के प्रयोग से बढ़ती हुई बेचैनी हमारे पर्यावरण में जैविक प्रजाति को होने वाले खतरों से आगाह करा रही है। आज आधुनिकता के अंधानुकरण से हमारे जीवन में रसायनों का जो प्रयोग बढ़ा है, वह भी कम खतरनाक नहीं है। आधुनिक औधोगिक अनुभव प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाले रसायनों के दीर्घकालिक खतरों से भरा पड़ा है। इन रसायनों में भारी धातुएँ, कार्बनिक विलायक, डाई-इण्टरमीडियट, ज़हरीली वाष्प और गैसीय उत्सर्जक शामिल हैं। इनमे से अनेक प्रदूषकों को हम भोजन, पानी और श्वास के साथ अपने शरीर में ले जाते है। खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक मनुष्य के लिए काफी खतरनाक साबित हो रहे हैं। देश में रसायनों का जो अंधाधुंध प्रयोग हो रहा है, उसके खतरनाक परिणाम हमें और हमारी पीढ़ियों को झेलने पड़ रहे है। कुछ रसायन जो अपने आप में सुरक्षित हैं, उस समय हानि पहुँचाते हैं जब वे अन्य पदार्थों से क्रिया कर लेते है। सोडियम और क्लोरीन दोनों खतरनाक हैं, किंतु साधारण नमक, सोडियम क्लोराइड जीवन के लिए जरूरी है। दूसरी ओर समुद्र का पानी पीने की दृष्टि से अत्यन्त ज़हरीला है और लम्बे समय तक नमक का सेवन रक्तचाप बढ़ने का कारण बन जाता है, जो एक दीर्धकलिक जोखिम है। रसायनों के बारे में समाज के प्रति उसके लाभों और खतरों के बारे में आज भी विश्वसनीय जानकारी नहीं है। आमजन को इन खतरनाक रसायनों के बारे में पूर्ण और विश्वसनीय जानकारी होने पर इनके खतरों से बचा जा सकता है। आज इन रसायनों के जोखिमों से अनेक तात्कालिक और दीर्धकालिक खतरे सामने आ रहे हैं। रसायनों के हानिकारक और विनाशकारी प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए हमें विवेकपूर्वक निर्णय लेने की आवश्यकता है। यह कार्य व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों दृष्टिकोणों से आवश्यक है। व्यक्ति के जीवन की सुरक्षा और स्वास्थ्य हमारी व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी है और सामाजिक जिम्मेदारी भी।