निर्देश: निम्न पद्यांश का अध्ययन कीजिए तथा प्रश्न संख्या 1 से 6 तक के सही विकल्प चुनिए:
विमल इन्दु की विशाल किरणें,
प्रकाश तेरा बता रही हैं।
अनादि तेरी अनन्त माया,
जगत को लीला दिखा रही हैं।
प्रसार तेरी दया का कितना,
ये देखना है तो देखें सागर।
तेरी प्रशंसा का राग प्यारे,
तरंग मालाएँ गा रही हैं। तुम्हारा स्मित हो जिसे निरखना, वो देख सकता है चंद्रिका को।
तुम्हारे हँसने की धुन में नदियाँ,
निनाद करती ही जा रही हैं।
विशाल मंदिर की यामिनी में,
जिसे देखनी हो दीपमाला।
तो तारागण की ज्योति उसका,
पता अनूठा बता रही है।
प्रभो! प्रेममय प्रकाश तुम हो,
प्रकृति-पद्मिनी के अंशुमाली।
असीम उपवन के तुम हो माली,
धरा बराबर बता रही है।
जो तेरी होवे दया, दया-निधि,
तो पूर्ण होता ही है मनोरथ,
सभी ये कहते पुकार करके,
यही तो आशा दिला रही है।
'प्रसार तेरी दया का कितना, ये देखना है तो देखें सागर।' तेरी प्रशंसा का राग प्यारे, तरंग मालाएँ गा रही हैं। कवि ने इन पंक्तियों में सागर से तुलना करके ईश्वर के किस गुण को प्रकट किया है?