Comprehension Passage
सोमवार 11 सितंबर 1893 की बात है। अमेरिका के शिकागो नगर में अपनी तरह का पहला, एक विश्व-धर्म सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने कहा जो - धर्म अनादि काल से सब मतों को समान रूप से ग्रहण करने की शिक्षा देता आया है, मैं उसी धर्म का प्रतिनिधि हूँ। जो धर्म दूसरे धर्मावलंबियों को केवल सम्मान की दृष्टि से ही नहीं देखता वरन उनके मतों को सत्य भी मानता है, मैं उसी धर्म को मानने वाला हूँ जो जातियुगों से सभी धर्मो तथा जातियों को भयभीत और अत्याचार से पीड़ित मनुष्यों को आदर के साथ आश्रय देती रही है, में उसी जाति के अंतर्गत होने के कारण अपने को गौरवान्वित समझता हूँ ।
विवेकानंद के भाषण में उनका कौन सा मनोभाव झलकता है ?
1
देश का गौरव
2
आत्मगौरव
3
भारतीय दर्शन
4
सत्यनिष्ठ