अनुच्छेद पढ़कर, दिए गए सवालों के सही जवाब चुनिए :-
“जीवन रूकने का नहीं चलते रहने का नाम है। कुछ लोग असफलता की अवस्था में निराश होकर अपने उत्साह का दामन छोड़ बैठते हैं। वे भूल जाते हैं कि परिश्रम और प्रयत्न में को बदल देने की भी क्षमता रहती है। आलसी बनकर रोना-धोना व्यर्थ है। मनुष्य इस संसार का सर्वश्रेष्ठ प्राणी है। अतः उसे अपना जीवन सार्थक बनाने के लिये आशा का सहारा ले चाहिये। आलसी बनकर समय व्यर्थ करना अपने साथ अन्याय करना है। हमें अपने साधनों एवं क्षमताओं का प्रयोग कर प्रगति के पथ पर बढ़ना चाहिये। हमें भावात्मक कार्य की जगह रचनात्मक कार्य करना चाहिये। दुख में घबराना कायरता का प्रतीक है। हर शाम सूरज को ढलना ही है। रात को आना ही है तो क्या अँधेरे में हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहा जाए या एक दीपक जला लें। सूर्य के समक्ष दीपक की क्या बिसात! पर एक दीपक भी पर्याप्त है एक घर को रोशन कर देने के लिये।”