निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दें।
पाश्चात्य ढंग की शिक्षा ने - विशेषकर अंग्रेज़ी की शिक्षा ने देश के बुद्धिजीवियों के सामने एक क्षितिज का उद्घाटन किया। परिणामस्वरूप भारतीय मनीषी अपने परिवेश की त्रासपूर्ण विघटनमयी स्थिति के प्रति सजग हुए और उसके व्यापक सुधार की आवश्यकता की ओर उनका ध्यान आकर्षित हुआ। इसका एक और कारण भी था, जिसका संबंध ईसाई धर्म प्रचार से है। राजनीतिक दासता के साथ-साथ इस सांस्कृतिक आक्रमण ने यहाँ के चिंतकों को और भी अधिक आंदोलित कर दिया। इसका परिणाम था - भारतीय पुनर्जागरण का व्यापक आंदोलन। राजा राममोहन राय, तिलक, गाँधी, गोखले, विवेकानंद आदि इसी विराट आंदोलन के नेता थे। आधुनिक हिंदी कवि जिस वातावरण में सांस ले रहे थे उसका निर्माण इन्हीं महापुरुषों के प्रयत्नों के फलस्वरूप हुआ था। भारत में विज्ञान और यंत्रों का विकास स्वाभाविक रूप में नहीं अपितु साम्राज्यवाद का अंग और शोषण का साधन बनकर हुआ। गाँधीवाद में यांत्रिकता का जो विरोध मिलता है, उसका यह प्रधान कारण है। नवीन शिक्षा-पद्धति, अंग्रेज़ी के प्रभाव और अंग्रेज़ी से प्रभावित बंगला - साहित्य के सम्पर्क ने व्यक्तिवादी भावना को जगाया। जिससे उनमें विद्रोह की भावना बढ़ी। यह विद्रोह छायावादी कवियों में भी व्यापक रूप में दिखाई देता है। देश की दासता से लेकर कविता के विषय, भाव, भाषा, छंद आदि सभी क्षेत्रों में नये मूल्यों की प्रतिष्ठा का प्रयास किया गया। नई शिक्षा ने अनन्त सम्भावनाओं को उजागर तो किया, किंतु उनको साकार करने के अवसर नहीं के बराबर थे। फलस्वरूप असफलता और कुण्ठा से उत्पन्न विक्षोभ, क्रांति और घोर व्यक्तिवादिता के स्वर छायावादियों में निरंतर अधिक सशक्त और मुखर होते गये।